पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अब भारतीय युवाओं को इंटरनेट मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाकर उन्हें कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों की ओर धकेलने की कोशिश कर रही है। इस पूरे नेटवर्क में पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी को आगे किया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक, शहजाद भट्टी मॉड्यूल के खिलाफ अब तक 12 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में 51 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से हैंड ग्रेनेड, विदेशी हथियारों की खेप और पेट्रोल बम बरामद किए गए थे।
क्या है शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN)?
सरकार के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क एक ISI-समर्थित टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट है। इसका मुखिया शहजाद भट्टी है जो कि पाकिस्तान में बैठा है और ISI के इशारे पर काम करता है। सरकार का आरोप है कि यह नेटवर्क युवाओं और छोटे अपराधियों को लालच देकर कट्टरपंथी बना रहा था और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सद्भाव को निशाना बना रहा था। ये नेटवर्क नफरत फैलाने वाला डिजिटल कंटेंट प्रकाशित कर रहा था और जासूसी कर रहा था।

शहजाद भट्टी नेटवर्क आतंकी संगठन घोषित
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी के नेटवर्क के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय (MHA) ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर शहजाद भट्टी के नेटवर्क (SBN) को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, UAPA, 1967 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।
14 राज्यों में 253 ऑपरेटिव सक्रिय थे
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के 14 राज्यों- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में 253 ऑपरेटिव सक्रिय थे, जिन्हें मल्टी-स्टेट क्रैकडाउन में गिरफ्तार किया गया है। कानूनी तौर पर सरकार ने UAPA की धारा 35(1)(a) का इस्तेमाल कर शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) को UAPA की पहली अनुसूची में जोड़ दिया है, जिसमें आतंकी संगठन के तौर पर घोषित संगठनों की लिस्ट है। अब तक SBN के गुर्गों पर अलग-अलग राज्यों में हत्या, फिरौती, आर्म्स एक्ट जैसे सामान्य अपराधों में केस दर्ज होते थे। UAPA में आने के बाद पूरा नेटवर्क एक बैन टेरर सिंडिकेट माना जाएगा।
कैसे काम करते हैं ये नेटवर्क?
जांच के मुताबिक, शहजाद भट्टी के अलावा पाकिस्तान में मौजूद दाऊद इब्राहिम, मुन्ना झिंगाड़ा और अजमल गुर्जर जैसे अपराधियों के नाम का इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को आसान पैसा, हथियार और विदेश में बसने जैसे लालच दिए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह हाइब्रिड और प्रॉक्सी वार का एक खतरनाक तरीका है। इसमें पारंपरिक आतंकी संगठनों के कैडर के बजाय स्थानीय अपराधियों और ऐसे बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता है, जिनका पहले कोई आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसे युवाओं को रेकी, हथियार पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर अकेले हमले जैसे कामों में इस्तेमाल करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।

इंटरनेट मीडिया शहजाद भट्टी नेटवर्क का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। पहले युवाओं से ऑनलाइन संपर्क किया जाता है, फिर उन्हें पैसे और अपराध की दुनिया का लालच देकर धीरे-धीरे आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनाने की कोशिश की जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि ऐसे मॉड्यूल में शामिल कई युवक पहली नजर में सामान्य नजर आते हैं। उनका कोई पुराना आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता। यही वजह है कि एजेंसियां अब सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे नेटवर्क और पाकिस्तान से संचालित हो रहे अपराध-आतंक के गठजोड़ पर खास नजर रख रही हैं।
आतंकी संगठन घोषित करने के फायदे
- कानूनी कार्रवाई हुई आसान: शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कार्रवाई हो गई है और पकड़े गए आरोपियों की जमानत लगभग नामुमकिन हो गई है।
- सदस्यता ही अपराध: अब सिर्फ SBN से जुड़ा होना, उसके लिए भर्ती करना या उसका काम-काज संभालना अपने आप में UAPA के तहत सीधा अपराध बन गया है।
- सख्त जमानत प्रावधान: भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे सामान्य कानूनों के मुकाबले UAPA में जमानत मिलना बेहद मुश्किल है। इससे बड़े ऑपरेटिव जेल में ही रहेंगे और सबूत नष्ट नहीं कर पाएंगे।
- अपराध की धारणा: हथियार, विस्फोटक या उंगलियों के निशान मिलने पर अदालत आरोपी के खिलाफ अपराध की धारणा (Presumption of Guilt) लगा सकती है।
- ज्यादा हिरासत और चार्जशीट का समय: UAPA में पुलिस 15 दिन की जगह 30 दिन तक पुलिस कस्टडी ले सकती है और बिना डिफॉल्ट जमानत के चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का समय मिलता है।
- केंद्रीय और अंतर-राज्य समन्वय: 14 राज्यों में फैले इस नेटवर्क पर अब NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी आसानी से किसी भी राज्य की FIR को अपने हाथ में ले सकती है। अब जांच एजेंसियां सिंडिकेट से जुड़े बैंक खाते, प्रॉपर्टी और संपत्ति को ट्रेस, जब्त और फ्रीज कर सकती हैं।
- नार्को-टेरर नेक्सस खत्म: यह नेटवर्क सीमा पार से नशा, हथियार और विस्फोटक की तस्करी से पैसा कमाता है। इस घोषणा के बाद एजेंसियां पूरे भारत में इसकी फाइनेंशियल पाइपलाइन को व्यवस्थित तरीके से बंद कर सकती हैं।
- डिजिटल प्रोपेगैंडा और कट्टरपंथ पर लगाम: नेटवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर नफरत फैलाता है और युवाओं को बरगलाता है। अब एजेंसियां कानूनी तौर पर उनके चैनलों को ब्लॉक कराने, एन्क्रिप्टेड बातचीत को इंटरसेप्ट करने और उनका प्रोपेगैंडा शेयर या होस्ट करने वालों पर भी मुकदमा चला सकती हैं।
कुल मिलाकर, गृह मंत्रालय के इस फैसले ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क को एक लोकल गैंगस्टर गैंग से निकालकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने एक संगठित आतंकी ढांचे के तौर पर स्थापित कर दिया है, जिससे राष्ट्रीय जांच एजेंसियां और राज्य पुलिस एक साथ मिलकर एक ही कानून के तहत कार्रवाई कर सकेंगी।
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